सनातन धर्म रक्षा परिषद के उद्देश्यों का विस्तृत वर्णन
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सनातन धर्म का संरक्षण एवं संवर्धन
- परिषद का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं, शास्त्रों, संस्कारों, वेद–पुराणों, उपनिषदों तथा भारतीय संस्कृति की रक्षा करना होगा।
- हिंदू समाज में धर्म के प्रति जागरूकता फैलाना।
- वैदिक संस्कृति एवं भारतीय जीवन मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना।
- धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन, प्रकाशन एवं वितरण करना।
- नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति से जोड़ना।
- सनातन धर्म केवल एक धर्म नहीं बल्कि जीवन जीने की एक शाश्वत पद्धति है, जो सत्य, अहिंसा, सेवा, करुणा, तप, त्याग और धर्म के सिद्धांतों पर आधारित है। परिषद का प्रथम और सर्वोच्च उद्देश्य सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं, धार्मिक मूल्यों एवं सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करना होगा।
- परिषद वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, भगवद्गीता एवं पुराणों के अध्ययन एवं प्रचार हेतु विशेष अभियान चलाएगी। समाज में यह जागरूकता विकसित की जाएगी कि सनातन धर्म वैज्ञानिक, मानवतावादी एवं विश्व कल्याण की भावना पर आधारित है।
- नई पीढ़ी में पश्चिमी प्रभाव के कारण भारतीय संस्कृति से बढ़ती दूरी को समाप्त करने हेतु परिषद विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं सामाजिक मंचों पर भारतीय संस्कारों, योग, ध्यान एवं धर्म शिक्षा से संबंधित कार्यक्रम आयोजित करेगी।
- इसके अतिरिक्त धार्मिक साहित्य का प्रकाशन, डिजिटल माध्यमों पर धर्म प्रचार, संस्कृत भाषा का संरक्षण एवं वैदिक ज्ञान पर शोध कार्य भी परिषद के प्रमुख कार्यों में सम्मिलित होंगे।
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धर्म एवं राष्ट्र जागरण
- समाज में राष्ट्रभक्ति, धर्मभक्ति एवं सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देना।
- भारत की सनातन परंपराओं, तीर्थों एवं धार्मिक धरोहरों की रक्षा हेतु कार्य करना।
- समाज में नैतिकता, सदाचार एवं अनुशासन की भावना विकसित करना।
- “वसुधैव कुटुम्बकम्” एवं “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के सिद्धांतों का प्रचार करना।
- परिषद का उद्देश्य धर्म और राष्ट्र को एक-दूसरे का पूरक मानते हुए समाज में राष्ट्रभक्ति एवं धर्मनिष्ठा की भावना विकसित करना होगा। भारत की सभ्यता एवं संस्कृति हजारों वर्षों पुरानी है, जिसकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
- परिषद विभिन्न जनजागरण अभियानों, सभाओं, रैलियों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को अपने धर्म एवं राष्ट्र के प्रति जागरूक करेगी। “राष्ट्र प्रथम” की भावना को बढ़ावा दिया जाएगा तथा समाज में सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय एकता स्थापित करने हेतु कार्य किया जाएगा।
- युवाओं को भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों, संतों, ऋषियों एवं महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने हेतु प्रेरित किया जाएगा। परिषद देश विरोधी गतिविधियों, सांस्कृतिक आक्रमणों एवं सामाजिक विघटन के विरुद्ध वैधानिक एवं लोकतांत्रिक माध्यमों से आवाज उठाएगी।
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गौ रक्षा एवं पशु सेवा
- श्रद्धालुओं को अपनी बुकिंग की पुष्टि की मुद्रित प्रति साथ रखनी होगी।
- सुरक्षाकर्मियों को प्रवेश की अनुमति देने से पहले पहचान पत्र की जांच करने का अधिकार है।
- देर से पहुंचने पर भीड़ और सुरक्षा नियमों के आधार पर दर्शन में देरी हो सकती है या प्रवेश से इनकार किया जा सकता है।
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गौ रक्षा एवं पशु सेवा
- गौवंश संरक्षण हेतु गौशालाओं की स्थापना एवं संचालन करना।
- घायल, बीमार एवं बेसहारा पशुओं की सेवा एवं चिकित्सा व्यवस्था करना।
- जैविक खेती एवं गौ आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना।
- पशु क्रूरता के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाना।
- भारतीय संस्कृति में गौ माता को विशेष स्थान प्राप्त है। परिषद गौवंश संरक्षण एवं पशु सेवा को धर्म एवं मानवता का महत्वपूर्ण कार्य मानते हुए गौशालाओं की स्थापना एवं संचालन करेगी।
- सड़क पर घायल, बीमार एवं बेसहारा पशुओं के उपचार हेतु पशु चिकित्सा शिविर, एम्बुलेंस सेवा एवं राहत केंद्र स्थापित किए जाएंगे। किसानों को जैविक खेती, गोबर गैस, पंचगव्य एवं गौ आधारित कृषि पद्धतियों के प्रति प्रोत्साहित किया जाएगा।
- गौ तस्करी एवं पशु क्रूरता के विरुद्ध कानून सम्मत जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को आधुनिक पशुपालन तकनीक एवं पशु स्वास्थ्य संबंधी प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।
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धार्मिक शिक्षा एवं संस्कार निर्माण
- गुरुकुल, संस्कार केंद्र एवं धार्मिक प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना करना।
- बच्चों एवं युवाओं के लिए नैतिक शिक्षा, योग, ध्यान एवं भारतीय संस्कृति पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना।
- वेद, गीता, रामायण, महाभारत आदि के अध्ययन हेतु पाठ्यक्रम विकसित करना।
- ब्राह्मण, संत एवं धर्म प्रचारकों को सहयोग प्रदान करना।
- समाज में नैतिक मूल्यों एवं धार्मिक संस्कारों की स्थापना परिषद का प्रमुख उद्देश्य होगा। इसके लिए गुरुकुल, संस्कार केंद्र, वेद विद्यालय एवं धार्मिक प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की जाएगी।
- बच्चों एवं युवाओं को भारतीय संस्कृति, माता-पिता के सम्मान, गुरु परंपरा, चरित्र निर्माण एवं सामाजिक जिम्मेदारी के बारे में शिक्षित किया जाएगा। परिषद नियमित रूप से गीता पाठ, रामायण कथा, योग शिविर, ध्यान प्रशिक्षण एवं संस्कार वर्ग आयोजित करेगी।
- ब्राह्मणों, संतों एवं धर्म प्रचारकों को सम्मान एवं सहयोग प्रदान करते हुए धार्मिक परंपराओं को मजबूत बनाया जाएगा। विवाह, नामकरण, यज्ञोपवीत एवं अन्य संस्कारों की वैदिक पद्धति को बढ़ावा दिया जाएगा।
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समाज सेवा एवं मानव कल्याण
- गरीब, असहाय एवं जरूरतमंद लोगों की सहायता करना।
- निशुल्क भोजन, वस्त्र, शिक्षा एवं चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना।
- रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य शिविर एवं आपदा राहत कार्य आयोजित करना।
- महिला, वृद्ध एवं दिव्यांग कल्याण हेतु योजनाएं चलाना।
- परिषद धर्म को केवल पूजा तक सीमित न मानकर मानव सेवा को ही सच्चा धर्म मानेगी। गरीब, असहाय, अनाथ, वृद्ध एवं जरूरतमंद लोगों की सहायता हेतु सेवा कार्य चलाए जाएंगे।
- निशुल्क भोजन वितरण, वस्त्र वितरण, शिक्षा सहायता, चिकित्सा शिविर एवं रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप, महामारी एवं अन्य संकटों में राहत कार्य किए जाएंगे।
- गरीब छात्रों को छात्रवृत्ति, विधवा महिलाओं को सहायता एवं दिव्यांग व्यक्तियों के पुनर्वास हेतु योजनाएं चलाई जाएंगी। परिषद समाज में सेवा, सहयोग एवं मानवता की भावना को मजबूत करेगी।
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युवा शक्ति एवं संगठन निर्माण
- युवाओं को राष्ट्र एवं धर्म सेवा के लिए प्रेरित करना।
- जिला, तहसील एवं ग्राम स्तर तक संगठन का विस्तार करना।
- स्वयंसेवक प्रशिक्षण शिविर एवं नेतृत्व विकास कार्यक्रम आयोजित करना।
- युवाओं में नशामुक्ति एवं चरित्र निर्माण अभियान चलाना।
- युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। परिषद युवाओं को राष्ट्र निर्माण एवं धर्म सेवा के लिए संगठित करेगी।
- ग्राम, तहसील, जिला एवं राज्य स्तर पर संगठनात्मक इकाइयों का गठन किया जाएगा। स्वयंसेवकों को नेतृत्व, अनुशासन, सामाजिक सेवा एवं आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति, अपराध एवं सामाजिक विकृतियों के विरुद्ध नशामुक्ति एवं चरित्र निर्माण अभियान चलाए जाएंगे। खेलकूद, योग एवं राष्ट्रभक्ति कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान की जाएगी।
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मंदिर एवं धार्मिक स्थलों का संरक्षण
- प्राचीन मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं पुनर्निर्माण हेतु कार्य करना।
- मंदिरों में स्वच्छता, सुरक्षा एवं धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देना।
- धार्मिक यात्राओं एवं तीर्थ सेवा कार्यक्रम आयोजित करना।
- मंदिर भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिकता के केंद्र हैं। परिषद प्राचीन मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों के संरक्षण, पुनर्निर्माण एवं विकास हेतु कार्य करेगी।
- मंदिरों में स्वच्छता अभियान, सुरक्षा व्यवस्था एवं धार्मिक गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से संचालित करने में सहयोग किया जाएगा। तीर्थ यात्रियों के लिए सेवा शिविर, भोजन व्यवस्था एवं चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
- ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व वाले धार्मिक स्थलों की जानकारी को दस्तावेजी रूप में संरक्षित किया जाएगा।
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महिला सशक्तिकरण एवं संस्कृति रक्षा
- महिलाओं को धर्म, शिक्षा एवं आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में प्रोत्साहित करना।
- भारतीय संस्कृति एवं पारिवारिक मूल्यों की रक्षा हेतु अभियान चलाना।
- कन्या शिक्षा एवं महिला सुरक्षा संबंधी कार्यक्रम आयोजित करना।
- भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति स्वरूप माना गया है। परिषद महिलाओं को शिक्षा, आत्मनिर्भरता एवं नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ाने हेतु कार्य करेगी।
- महिला सुरक्षा, कन्या शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता एवं स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। महिलाओं को भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों एवं सामाजिक नेतृत्व में सक्रिय भूमिका निभाने हेतु प्रेरित किया जाएगा।
- महिला उत्पीड़न, दहेज प्रथा एवं सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
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पर्यावरण एवं प्रकृति संरक्षण
- सनातन संस्कृति प्रकृति को देवतुल्य मानती है। परिषद पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन हेतु अभियान चलाएगी।
- वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छता अभियान एवं जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। नदियों, तालाबों एवं गौचर भूमि के संरक्षण हेतु सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
- लोगों को प्लास्टिक मुक्त एवं पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
- यज्ञ, हवन, सत्संग, कथा, भजन संध्या एवं धार्मिक सम्मेलनों का आयोजन करना।
- सनातन धर्म से संबंधित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित करना।
- हिंदू त्योहारों एवं सांस्कृतिक आयोजनों को संगठित रूप से मनाना।
- परिषद विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करेगी जिससे समाज में आध्यात्मिकता एवं सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा मिले।
- यज्ञ, हवन, सत्संग, कथा, भजन संध्या, संत सम्मेलन, शोभायात्रा एवं धार्मिक मेले आयोजित किए जाएंगे। हिंदू पर्वों एवं त्योहारों को सामाजिक समरसता एवं अनुशासन के साथ मनाने हेतु विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
- राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धर्म सम्मेलन आयोजित कर विश्व में भारतीय संस्कृति का प्रचार किया जाएगा।
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विधिक एवं सामाजिक सहायता
- धार्मिक अधिकारों एवं हिंदू समाज के हितों की रक्षा हेतु वैधानिक सहायता प्रदान करना।
- समाज में फैल रही कुरीतियों एवं सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध अभियान चलाना।
- धार्मिक स्वतंत्रता एवं सांस्कृतिक अधिकारों के संरक्षण हेतु कार्य करना।
- परिषद हिंदू समाज एवं धार्मिक अधिकारों की रक्षा हेतु वैधानिक सहायता प्रदान करेगी।
- जरूरतमंद लोगों को कानूनी परामर्श, सामाजिक विवादों में मध्यस्थता एवं प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। समाज में फैल रही कुरीतियों, नशाखोरी, अशिक्षा एवं सामाजिक विभाजन के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
- धार्मिक स्वतंत्रता एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु परिषद लोकतांत्रिक एवं कानूनी माध्यमों का उपयोग करेगी।
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आर्थिक एवं आत्मनिर्भरता विकास
- स्वरोजगार, कौशल विकास एवं ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देना।
- गरीब परिवारों हेतु सहायता एवं आत्मनिर्भरता योजनाएं चलाना।
- धर्मार्थ परियोजनाओं के लिए दान, CSR एवं सामाजिक सहयोग जुटाना।
- गरीबी एवं बेरोजगारी दूर करने हेतु परिषद स्वरोजगार एवं कौशल विकास कार्यक्रम चलाएगी।
- ग्रामीण उद्योग, हस्तशिल्प, गौ आधारित उद्योग, कृषि आधारित व्यवसाय एवं महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित किया जाएगा। युवाओं को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन एवं रोजगार सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
- दान, CSR एवं सामाजिक सहयोग के माध्यम से सेवा परियोजनाओं के लिए आर्थिक संसाधन जुटाए जाएंगे।
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राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समन्वय
- देश एवं विदेश में रहने वाले सनातन धर्मावलंबियों को एक मंच पर जोड़ना।
- विभिन्न धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के साथ समन्वय स्थापित करना।
- विश्व स्तर पर भारतीय संस्कृति एवं सनातन विचारधारा का प्रचार करना।
- परिषद देश एवं विदेश में रहने वाले सनातन धर्मावलंबियों को एक मंच पर जोड़ने का प्रयास करेगी।
- विश्वभर के हिंदू संगठनों, मंदिरों एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ सहयोग स्थापित किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं धार्मिक यात्राओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति का वैश्विक प्रचार किया जाएगा।
- विदेशों में रहने वाले भारतीय युवाओं को अपनी जड़ों एवं संस्कृति से जोड़ने हेतु विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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डिजिटल एवं मीडिया प्रचार
- वेबसाइट, मोबाइल ऐप, सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से धर्म प्रचार करना।
- धार्मिक साहित्य, वीडियो, पत्रिका एवं ऑनलाइन प्रशिक्षण सामग्री तैयार करना।
- युवाओं को डिजिटल माध्यम से सनातन विचारधारा से जोड़ना।
- आधुनिक युग में डिजिटल माध्यम सबसे प्रभावशाली साधन हैं। परिषद वेबसाइट, मोबाइल ऐप, सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से धर्म एवं संस्कृति का प्रचार करेगी।
- धार्मिक वीडियो, ऑनलाइन प्रवचन, ई-पुस्तकें, डिजिटल पत्रिका एवं प्रशिक्षण सामग्री तैयार की जाएगी। युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से सकारात्मक एवं सांस्कृतिक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
- फेक न्यूज़ एवं धर्म विरोधी प्रचार के विरुद्ध तथ्यात्मक एवं वैधानिक जानकारी प्रसारित की जाएगी।
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संगठन का दीर्घकालिक लक्ष्य
- भारत के प्रत्येक जिले एवं ग्राम तक संगठन की इकाइयों का गठन करना।
- धर्म, सेवा एवं राष्ट्र निर्माण को एकीकृत मॉडल के रूप में स्थापित करना।
- भविष्य में गुरुकुल, विश्वविद्यालय, अस्पताल, गौशाला एवं सेवा केंद्रों का राष्ट्रीय नेटवर्क विकसित करना।
- परिषद का दीर्घकालिक लक्ष्य भारत के प्रत्येक गांव, तहसील, जिला एवं राज्य तक संगठन का विस्तार करना होगा।
- भविष्य में गुरुकुल, विश्वविद्यालय, अस्पताल, गौशाला, वृद्धाश्रम, अनाथालय एवं सेवा केंद्रों का राष्ट्रीय नेटवर्क स्थापित करने की योजना बनाई जाएगी।
- धर्म, सेवा, शिक्षा एवं राष्ट्र निर्माण को एकीकृत मॉडल के रूप में विकसित कर समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच बनाई जाएगी। परिषद का उद्देश्य एक संगठित, संस्कारित, आत्मनिर्भर एवं राष्ट्रभक्त समाज का निर्माण करना होगा, जो सनातन मूल्यों पर आधारित हो।
“धर्म एव हतो हन्ति, धर्मो रक्षति रक्षितः”
“सनातनं सदा विजयते”
“शस्त्र से धर्म की रक्षा”
“शास्त्र से सनातन का प्रचार”
“परंपरा से संस्कृति का संवर्धन”
“संस्कार से राष्ट्र का उत्थान”